🕉 स्थापना एवं संस्थापकों की ऐतिहासिक भूमिका

स्थापना तिथि: 4 जुलाई 1978
स्थान: श्री पशुपतिनाथ मंदिर, गोविंदपुरा, भोपाल

श्री पशुपतिनाथ मंदिर, गोविंदपुरा – भोपाल, न केवल एक आध्यात्मिक स्थल है, बल्कि नेपाली समुदाय की आस्था, एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक भी है। इस महान मंदिर की स्थापना 4 जुलाई 1978 को हुई, जिसे एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में याद किया जाता है।

इस पवित्र कार्य की परिकल्पना को साकार रूप देने में श्री शक बहादुर पुन जी का मुख्य और निर्णायक योगदान रहा। उन्हें मंदिर के प्रमुख संस्थापक (Chief Founder) के रूप में सादर नमन किया जाता है। उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और समर्पण ने श्री पशुपतिनाथ मंदिर की नींव रखी, जो आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है।

🔹 अन्य संस्थापक सदस्यों का योगदान:

इस पुनीत कार्य में अनेक अन्य समर्पित व्यक्तियों ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई। उनके सामूहिक प्रयास, श्रम और श्रद्धा के बिना यह दिव्य मंदिर संभव न हो पाता। उनके नाम इस प्रकार हैं:

📋 कार्यकारिणी समिति (दिनांक 4.07.1978 से 15.08.1981 तक)

पदाधिकारी का नामपद
स्व. श्री शक बहादुर पुनअध्यक्ष
स्व. श्री संत बहादुर गुरुंगउपाध्यक्ष
स्व. श्री चक्र बहादुर श्रेष्ठउपाध्यक्ष
स्व. श्री चंद्रकांत कणेलमहामंत्री
स्व. श्री दानबहादुर मल्लमहामंत्री
 श्री दिवाकर अर्यालकार्या. मंत्री
स्व. श्री कर्ण बहादुर रानाकोषाध्यक्ष
श्री हुम बहादुर थापाप्रबन्धक
श्री योग विक्रम शाहप्रबन्धक
श्री डिल बहादुर थापासंगठन मंत्री
श्री रामलाल शर्मासंगठन मंत्री
श्री चन्द्र सिंह कटियारसंगठन मंत्री

✨ श्रद्धांजलि और प्रेरणा

“श्री पशुपतिनाथ मंदिर केवल ईंट और पत्थरों से बना ढांचा नहीं, यह उन व्यक्तित्वों की जीवंत गाथा है जिन्होंने अपने जीवन के अमूल्य क्षण इस धरोहर के लिए समर्पित किए।”

आज यह मंदिर उनके संस्कारों, मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहर का साक्षात प्रतीक बन चुका है। हम सभी श्रद्धापूर्वक उन संस्थापकों को नमन करते हैं और उनके पदचिह्नों पर चलते हुए इस पवित्र स्थल की सेवा हेतु समर्पित हैं।